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गुरु का परिचय

Acharya Jai Dev समाज में सनातन धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है; वे समाज के सार्थक विकास के लिए कई क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।

विवाह सहयोग: गुरु जी द्वारा अपने बहनों और बेटियों की शादी में आर्थिक सहयोग, सामग्री व योगदान दिया जाता है, ताकि हर परिवार सम्मान से बड़े दिन का आनंद उठा सके।

गुरुकुल संचालन: बच्चों की शिक्षा-दीक्षा व संस्कार को बढ़ावा देने के लिए Gurukul संस्थान चलाया जाता है, जहाँ पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा दोनों साथ मिलती हैं।

मंदिर निर्माण: समाज में देव-आस्था व संस्कृति की रक्षा के लिए कई मंदिरों का निर्माण करवाया गया है।

स्वास्थ्य सहयोग: ज़रूरतमंदों को चिकित्सीय सहायता और स्वास्थ्य जागरूकता पहुँचाई जाती है।

धार्मिक प्रवचन एवं कार्यक्रम: बड़े स्तर पर आयोजित धर्म, संतों और विद्वानों के प्रवचनों से समाज को प्रोत्साहित किया जाता है ताकि लोग धर्म, संस्कृति व आध्यात्म की ओर अग्रसर हों।

Acharya Jai Dev जी की योग्यता

आचार्य जयदेव जी ने अपने गुरु, परम पूज्य आचार्य श्री बलदेव जी के मार्गदर्शन में संस्कृत व्याकरण, योग, दर्शन, वेद और उपनिषदों में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है।

उन्होंने स्नातकोत्तर (आचार्य) की उपाधि इन विषयों में प्राप्त की, जिससे उनकी विद्वत्ता और शास्त्रीय ज्ञान में गहराई आई है।
बाद में, आचार्य जी को महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन और लेखन से विशेष प्रेरणा मिली।
उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ और ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ जैसे ग्रंथों का गहन अध्ययन कर, वैदिक साहित्य को समझने और समाज में फैलाने के लिए स्वयं को समर्पित किया है।

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यह अनुभव और अध्ययन, आचार्य जयदेव जी को न केवल विद्वान बल्कि एक प्रबुद्ध मार्गदर्शक बनाते हैं, जो सनातन धर्म के मूल्यों और वैदिक संस्कृति के प्रचार में समर्पित हैं।

Acharya Jai Dev का विश्वास है कि समाज में परिवर्तन तभी संभव है जब हम अपने संस्कार, संस्कृति और धर्म को पहचानें और उन्हें जीवन में अपनाएँ। इसी भाव से हर कार्य, हर आयोजन और सेवा में उनका मार्गदर्शन रहता है।

- Acharya Jai Dev